खेतों में मक्के के अवशेष जलाते किसान
मक्के का अवशेष जलाना
पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा!
बढ़ रही हैं बीमारियां
धुएं से आंखों में जलन, खांसी और सांस की समस्या बढ़ती है।
बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति
हो रही
नष्ट
किसान मक्के की कटाई के बाद खेतों में बचे डंठलों को सीधे आग लगा देते हैं।
आग लगाने से मिट्टी के पोषक तत्व, केचुए और अच्छे जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट होने लगती है
ग्रामीणों का कहना है कि अब तक किसानों को अवशेष प्रबंधन के बारे में सही जानकारी या प्रशिक्षण नहीं मिला है
मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड के मोरसंडी गांव में किसान मक्के के डंठल जला रहे हैं। अच्छी पैदावार के बावजूद किसान इसके पर्यावरणीय नुकसान से अनजान हैं।
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