अनन्या 17 वर्ष की लड़की है. उसका जन्म हरियाणा के गुरुग्राम जिले के चंदू गांव में हुआ. अनन्या के माता-पिता बिहार के निवासी है. वह 10वीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से हरियाणा में ही उत्तीर्ण की. एक दिन उसे पता चला कि उसकी बड़ी बहन नौकरी बिहार में लगी है और उनको बिहार जाना पड़ेगा. यह बात सुनकर अनन्या बेहद निराश हुई. वह बिहार में रहना हमेशा के लिए कदाचित पसंद नहीं करती थी. क्योकि बिहारियों के बारे में सभी से अनरगल बातें सुनीं थी.लेकिन जब बिहार में रहने लगी तो, बिहार की हो गयी. वह कहती है, बिहारी होने पर हमें गर्व है.

वर्ग – 11 वीं ,
उच्च मा. विद्यालय जारंग पूर्वी
अनन्या बस के केबिन में बैठी सुबक-सुबक कर रो रही थीं. दोनों हरियाणा से बिहार हमेशा के लिए आ रही थी. अनन्या अपने परिवार के साथ थी, लेकिन उसके पिता वही रूक गये, ताकि वे काम करके घर की रोजी-रोटी चला सके. एक तरफ अपने पिता को अकेले छोड़के आने का गम था कि वे अकेले कैसे रहेंगी. कैसे खाये-पियेंगी और बिमार पड़ने पर कौन उनका देखभाल करेगा इत्यादि. दूसरी तरफ हरियाणा से बिहार जैसे प्रदेश में आना वो भी हमेशा के लिए अजीब लग रहा था.
अनन्या 17 वर्ष की लड़की है. उसका जन्म हरियाणा के गुरुग्राम जिले के चंदू गांव में हुआ था. अनन्या के माता-पिता बिहार के निवासी है. अनन्या पढ़ाई में सक्षम है. उसने 10वीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से हरियाणा में ही उत्तीर्ण की. जब एक दिन उसे पता चला कि उसकी बड़ी बहन नौकरी बिहार में लगी है और उनको बिहार जाना करना पड़ेगा.
यह बात सुनकर अनन्या बेहद निराश हुई. वह बिहार में रहना हमेशा के लिए कदाचित पसंद नहीं करती थी. क्योंकि, उसने बिहारी, बिहार नाम को नकारात्मक ढंग से जाना था. यद्यपि कोई व्यक्ति जिनका रहन-सहन गंदा, या फिर कोई व्यक्ति बदसूरत या मैला वस्त्र पहने दिख जाए, तो लोग उसे बिहारी, बिहारी बोलकर उनको नीचा दिखाते हैं. अनन्या ने बाहर में रहकर बिहार के बारे में यही सब समाज से सुना और देखा था.
12वीं में दाखिला नहीं होने से एक साल हो गयी पीछे
जब अनन्या हरियाणा से 11वीं कक्षा पास करके बिहार आयी, तो उसका दाखिला संघर्ष करने पर भी 12वीं में नहीं हो सका. इसके कारण अनन्या अपने मित्रों व सहपाठियों से एक साल पीछे हो गयी, यह उसे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. वह अपने मित्रों, सहपाठियों स्कूल को बेहद याद करती थी.
अनन्या का दाखिला जारंग पूर्वी में 11वीं कक्षा में हुआ, जो उसके गांव से 5 किमी दूरी पर था. अनन्या को ऐसा लगता है कि वह जितना हरियाणा में नहीं पढ़ती थी, उससे अत्यधिक वह बिहार में मन लगाकर पढ़ रही है. अनन्या को वहां से अच्छे शिक्षक बिहार में मिले, जो उसका पूरा सहयोग करते हैं और उसका मार्गदशन भी करते हैं.
उसे अपने स्कूल में एक अच्छी पद भी प्राप्त हुआ. किंतु, उसे अपनी कक्षा सूनी-सूनी लगती थी. क्योंकि, बच्चे प्रतिदिन स्कूल नहीं आते थे. वे सब इतने अच्छे शिक्षकों को छोड़कर घंटे का कोचिंग लेते थे. जिसमें विद्यार्थी क्या ही पढ़ पायेगा. वे बच्चे स्कूल के प्रति जागरूक नहीं थे. इसी अनन्या को कभी-शोर-गुल वाली कक्षा नहीं मिली. इसका एक लाभ यह भी था कि वह अपनी कक्षा में शांति से स्वाध्याय करती थी.
बिहार की कई समस्याओं को देख हैरान रह गयी अन्नया
धीरे-धीरे समय बीतता गया और अनन्या ने बिहार में कई समस्याओं को देखा, जैसे- अनन्या की गांव की महिलाएं अपने बच्चों के प्रति जागरूक नहीं थीं. बच्चों की देखभाल या साफ-सफाई पर ध्यान नहीं देती थीं. इसके कारण बच्चे बिमार हो जाते हैं और कुपोषण के शिकार हो जाते हैं. अनन्या कहती है यद्यपि वे महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं हैं, तो एक ग्रहिणी होने के नाते अपने बच्चों का साफ-सुथरा तो रख सकती है. इसमें तो किसी प्रकार के पैसे नहीं लगते हैं.
बिहार सरकार की ओर से प्रत्येक घरो में नल, शौचालय उपलब्ध कराये गये हैं. इसके अतिरिक्त बिहार सरकार शिक्षा के विकास के लिए से 8 तक की कक्षाओं के लिए निःशुल्क पढ़ाई की सामग्री, ड्रेस-जूते के पैसे, तथा मीडे- मील इत्यादि चीज़े उपलब्ध कराये जाते हैं. इसके अलावा अनन्या ने अपने स्कूल में यह भी देखा कि कुछ औरतें आती हैं और हेडमास्टर को एंव बोलती है कि हमर बऊआ के स्कूल का पैसा नहीं आया. फलनवा के बच्चे को तो आया. ये औरतें वे औरतें हैं, जो कभी भी यह पूछने नहीं आयी कि उसका बच्चा पढ़ता है कि नहीं. कैसे पढ़ता है. अनन्या ने देखा की ज्यादातर घरों में 3-3, 4-4, बच्चे होते हैं. हालांकि, गार्जियन की आर्थिक स्थिती इतनी अच्छी नहीं है कि वे उनको अच्छी शिक्षा, अच्छा जीवन दे सके. जो एक बड़ी समस्या है.
बिहार की समस्याओं के साथ जानी वहां की संस्कृति
बिहार में औद्योगिक, प्राद्योगिक न होने के कारण उनको अपना जीवन यापन के लिए बाहर मजदूरी करने पर विवश करता है. अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है. अनन्या ने बिहार की समस्याएं तो देखी है. इसके साथ-साथ उसने बिहार के वे रहस्य भी जाने, जो कभी नहीं जानती थी. वह बिहार से अपरिचित थी. अनन्या को लगता है बिहार में छठ पूजा को महापर्व कहा जाता है. लोग इसे ढोंग कहते हैं. लोग कहते हैं कि बाहरी दिखावा करते हैं.
ये लेकिन अब अनन्या जानती है कि जो सूर्य संसार को चलाता है, जिसकी पूजा प्राचीनकाल से सभी सभ्यताओं में की जाती रही है. सूर्य को जीवन, प्रकाश, शक्ति, प्रकृति के दाता भी कहते है. उनकी पूजा बिहार में की जाती है. क्योंकि बिहार अपनी पीढ़ियों के संस्कृति धार्मिक पर्वों को साथ लेकर चलता है. यह पर्व न केवल बिहार की औरतें करती हैं, बल्कि पुरुष भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेते है. और अनन्या को अब छठ से अलग-सा ही लगाव हो गया है.
अब अनन्या यह सच जानती है कि बिहार के लोगों को अक्सर भेद-भाव या पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है. अनन्या कहती है मेरी पहचान बिहारी है, और यही मेरी सबसे बड़ी खुद्दारी है.अब, अनन्या, को फर्क नहीं पड़ता की लोग क्या सोचते हैं. इतिहास गवाह है कि हमने ही दुनिया को शून्य (0), और लोकतंत्र दिया है. जिसे लोग माथे पर पिछड़ा होने का टीका लगाते है. उसी माथे के पसीने से देश की सड़क इमारतें बनती है, उनपे चलने में रहने मे लोगों को शर्म नहीं आती है. बिहारी होना कोई शर्म नहीं, एक संघर्ष का नाम है बिहारी. अनन्या कहती है’ “यूपी-बिहार की मिट्टी में वो बात है, जहां कई अभाव के बावजूद भी आइएएस, आइपीएस पैदा होते हैं.
अपने बिहारी होने पर गर्व है
एक औरत अनन्या की मां से कहती, तुम अपनी बिहारी भाषा छोड़े क्यों नहीं देती? अब तो तुम्हे हरियाणा में रहे 20 साल हो गये, तब अनन्या की मां जवाब देती है क्या तुम अपनी मातृ भाषा, तो छोड़ सकती हो, नहीं ना. तो फिर मैं कैसे अपनी मातृभाषा छोड़ दूं. सबसे बड़ी बात यह है कि जो लोग बिहारियों को हीन दृष्टि से देखते हैं, उन लोगों ने बिहार को कभी समझा ही नहीं, उससे वे कभी परिचित ही नहीं हुए. कभी उसके इतिहास को नहीं जानना चाहा. अब अनन्या बिहार से पूरी तरह परिचित है. उसे अपने बिहारी होने पर गर्व है.
अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रही अनन्या
इन दिनो अनन्या मन लगाकर पढ़ रही है. इसमें अनन्या के पिता उसका पूरा सहयोग कर रहे है. वे अनन्या को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने देते हैं. वे दिन-रात परिश्रम करते हैं. और अनन्या का स्वतंत्र, आत्मनिर्भर बनते देखना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि अनन्या पढ़ लिखकर एक अच्छी नौकरी करे और अपने कर्तव्य के प्रति बफादार रहे. अनन्या भी अपने सपने, अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रही है. अनन्या अनंत प्रयास अनन्या गर्व से कहती है मैं बिहारी हू. और मेरा भविष्य ही बिहार है और मैं इसको शिखर तक पहुंचाना चाहती हूं.






