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बाल विवाह कराने वाले पुजारी, पादरी व मौलाना अब जाएंगे जेल

सरकार ने बाल विवाह पर रोक को और सख्त बनाते हुए स्पष्ट किया है कि अब इस अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यदि कोई पुजारी, पादरी या मौलाना बाल विवाह संपन्न कराता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे जेल की सजा हो सकती है। यह कदम बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। संबंधित कानूनों के तहत दोषियों पर दंड और जुर्माना दोनों लागू हो सकते हैं।

बाल विवाह कराने वाले पुजारी, पादरी व मौलाना अब जाएंगे जेल
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अप्पन समाचार टोली, मुजफ्फरपुर। बाल विवाह कराने वाले पुजारियों, मौलानाओं और पादरियों को एक लाख का जुर्माना और दो साल की कैद होगी. यह सख्त चेतावनी मुजफ्फरपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने बुधवार को जिला कोर्ट के सभागार में पुजारियों, पादरियों और मौलानाओं की बैठक में दी है.

जानकारी के मुताबिक, बाल विवाह की रोकथाम के लिए बुधवार को यह बैठक की गयी, जिसमें जिले के सभी 16 प्रखंडों से 46 पुजारियों, पादरियों और मौलानाओं के अलावा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बताया गया कि यदि बाल विवाह की सूचना कहीं से भी मिलती है, तो इस टाॅल फ्री नंबर – 112, 1098, 181 पर सूचित करें. चूंकि यह जानकारी गोपनीय रखनी है, लेकिन कई बार सूचना देने वाले का मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिया जाता है. ऐसी स्थिति से निबटने के लिए सूचना देते समय ही बता दें कि मेरा नाम गोपनीय रहना चाहिए. यदि सार्वजनिक होगा, तो हम एफआईआर दर्ज करा देंगे.

बाल विवाह कराने वाले पुजारी, पादरी व मौलाना अब जाएंगे जेल

बैठक के दौरान एक मौलाना ने कहा कि अब हम हर जुमे की नमाज के दिन लोगों को बाल विवाह को लेकर जागरूक करेंगे. स्कूलों व मदरसों में भी इसको लेकर जागरूकता फैलाई जाएगी. पुजारियों और पादरियों ने भी संकल्प लिया कि हम इस सामाजिक बुराई को खत्म करने में अपना योगदान देंगे. बाल विवाह मुक्त भारत जागरुकता अभियान के तहत आयोजित बैठक में जिला जज श्वेता कुमारी सिंह ने कहा कि बाल विवाह अपराध की श्रेणी में आता है.

इसलिए जो भी धर्मगुरु यहां उपस्थित हैं, वे सभी लोग अपने-अपने समाज के लोगों को बाल विवाह नहीं करने की सलाह दें. बाल विवाह रोकने के लिए डालसा की ओर से चार जागरुकता रथ निकाले गए हैं.
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव सह मुख्य जिला व सत्र न्यायाधीश जयश्री कुमारी ने कहा कि बिना आधार कार्ड में जन्मतिथि देखे बिना कोई भी शादी नहीं कराएंगे. बाल विवाह कराएंगे, तो दोषी होंगे.

इस अवसर पर बाल विवाह से होने वाले नुकसान एवं बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के बारे में भी जानकारी दी गयी. सनद रहे कि इस कानून के तहत महिलाओं को सजा नहीं होती है, लेकिन विवाह में शामिल पुरुष सजा के दायरे में आते हैं.
इस मौके पर अधिवक्ता, पीबीएल, मदरसा के प्रतिनिधि, वन स्टेप सेंटर की ज्योति कुमारी, ज्योति महिला समाख्या की मृदुला कुमारी, आकांक्षा सेवा सदन की रेखा कुमारी आदि मौजूद थे.
इनपुट : यशोदा कुमारी पासवान

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