- मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंड के अमनौर मुसहर टोला का मामला
- स्कूल के पास भवन नहीं होने से प्रभावित हो रही बच्चों की पढ़ाई
औराई (मुजफ्फरपुर)। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. सर्व शिक्षा अभियान के तहत ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ का नारा दिया जाता है, ताकि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंच सके. इसके लिए बच्चों को मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति, मुफ्त किताबें, पोशाक आदि मुहैया कराए जा रहे हैं. इन प्रयासों से देश के कई हिस्सों में शिक्षा की स्थिति में सुधार भी देखने को मिला है. हालांकि, आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर जगहों पर शिक्षा की स्थिति लचर है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंडन्तर्गत अमनौर पंचायत के मुसहर टोला में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई आपको परेशान कर सकती है.
जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित इस मुसहर टोला में करीब 200 परिवार रहते हैं. अधिकतर लोग मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. गरीबी, लाचारी, बेकारी और संसाधनों की कमी के कारण यहां के बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना आसान नहीं है. गांव में स्कूल के पास अपना भवन तक नहीं है. इसलिए बच्चों की पढ़ाई आंगनबाड़ी केंद्र या अस्थायी जगहों पर कराई जाती है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई साल पहले इस बस्ती में एक पीपल के पेड़ के नीचे विद्यालय चलता था. बाद में उस विद्यालय को उत्क्रमित कर मिडिल स्कूल बनाया गया और मुसहर बस्ती में भवन निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हुई. लेकिन भवन पूरी तरह बनने से पहले ही स्कूल को अमनौर स्थानांतरित कर दिया गया. परिणाम यह हुआ कि मुसहर टोला के बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधा अधूरी रह गई.
आज स्थिति यह है कि यहां का प्राथमिक विद्यालय एक झोपड़ी और आंगनबाड़ी केंद्र तक सीमित होकर रह गया है. इसी जगह पर पहली से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई कराई जाती है. विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थापित हैं. शिक्षकों के अनुसार, स्कूल में करीब 93 बच्चों का नामांकन है, लेकिन नियमित रूप से केवल 14 बच्चे ही उपस्थित होते हैं. भवन, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों की उपस्थिति लगातार कम रहती है.
गांव के लोग बताते हैं कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से स्कूल भवन बनाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्कूल का भवन बन जाए और सुविधाएं उपलब्ध हों, तो बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सकती है.
मुसहर टोला की यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती हैं. सरकार की योजनाएं कागजों पर तो अच्छी दिखती हैं, लेकिन जब तक उनका सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक समाज के कमजोर वर्गों तक उसका लाभ नहीं पहुंच पाएगा. जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस ओर गंभीरता से ध्यान दें, ताकि मुसहर टोला के बच्चों को भी मुफ्त शिक्षा का अधिकार मिल सके और उनका भविष्य बेहतर बन सके.
@औराई से यशोदा कुमारी पासवान की रिपोर्ट










ग्रामीणों ने सही कहा है कि जन प्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों के उचित मांगों को हकीक़त में ध्यान देना जरूरी नहीं समझते हुए। स्थित तब तक नहीं सुधर पाएंगी जब तक विकास की वास्तविक व्यवस्था नहीं होगी।