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शराबियों के कारण गांव का बिगड़ रहा माहौल, डर के कारण स्कूल नहीं जा पाते बच्चे

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*आशा कुमारी

प्रखंड-बंदरा, पंचायत

रामपुरदयाल, गांव-पीयर.

Alcoholics are ruining the village environment, and children are unable to attend school due to fear.

‘’आशा कुमारी मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड स्थित पीयर गांव के मुसहर समाज की एक ऐसी किशोरी है, जो अपने समाज के छोटे-छोटे बच्चों के लिए रेमेडियल क्लास चलाती है. वह इंटर पास है. इस बार बीए में नामांकन करायेगी. मुसहर समुदाय की इस साहसी लड़की की यह पहली लिखित अभिव्यक्ति है’ जो हर किसी की मानवीय संवेदना को झकझोरती है. इस गांव में शिक्षा के प्रति गांव के लोगों में जागरूकता की कमी है.यहां के लोग शिक्षा से ज्यादा खेत और घर के काम पर अधिक ध्यान देते हैं.इन मुश्किलों के बावजूद अपनी मेहनत की बदौलत अपना भविष्य संवारने में कुछ होनहार छात्र-छात्राएं जुटे हैं. आइए पढ़िए यह सच्ची घटना पर आधारित अनकही कहानी‘’

मुजफ्फरपुर शहर से लगभग 30-32 किलोमीटर दूर बंदरा प्रखंड की रामपुर दयाल पंचायत अंतर्गत पीयर गांव गंडक किनारे बसा है. प्राकृतिक दृष्टिकोण से यह गांव काफी सुंदर है. खेतों की हरियाली और नदी की कल-कल धराओं को छूकर आती ठंडी-ठंडी हवाएं मन को शांति व दिल को सुकून देती हैं.

लेकिन, यहां कुछ समस्याएं भी हैं, जो माहौल को खराब करती है। गांव की प्रमुख समस्या है शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी. इससे गांव के कुछ बच्चे स्कूल जाते हैं, तो कुछ पढ़ाई छोड़ कर खेतों और घरों के काम में लगे रहते हैं. उनके माता-पिता पढ़ाई को उतना महत्व भी नहीं देते हैं. इसलिए उनके बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते हैं. हद की बात, तो यह है कि शराबबंदी लागू होने के बावजूद भी गांव के कुछ लोग शराब पीकर नशे में चूर रहते हैं.

फिर घर के अलावा बाहर भी हल्ला करते रहते हैं. अक्सर नशे में रहते है और परिवार की जिम्मेदारियों पर ध्यान नहीं देते. इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है और घर का वातावरण अच्छा नहीं रहता. इससे बच्चे की पढ़ाई प्रभावित होती है. कई बार बच्चे डर के कारण ठीक से बढ़ नहीं पाते. गांव के बच्चे और बच्चियां चाहती है कि अभिभावक समझदारी से काम लें और शराब जैसे बुरी आदतों को छोड़ दें.

साथ ही बेटा-बेटी की शिक्षा पर ध्यान दें, तो यह गांव आगे बढ़ सकता है. शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा और गांव का विकास संभव है. क्योंकि, हम बच्चे चाहते हैं कि पढ़ लिखकर जीवन में कुछ अच्छा करे. लेकिन घरों में शराबों को देखकर बच्चे डर जाते हैं. उनके अंदर अंधेरा छा जाता है. फिर भी वे चाहते है कि हार नहीं मानें.

अभी जैसा चल रहा है, चले लेकिन पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे. हम अपनी मंजिल को पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे और एक दिन अपने परिवार, गांव और देश का नाम रोशन करेंगे. लेकिन, फिलहाल गांव में बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था और खराब माहौल को लेकर बच्चे चिंतित है.ऐसे में शराब के खिलाफ और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न संगठनों को आगे आने की जरूरत है.

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