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मैं लड़की हूँ – बस यही मेरी पहचान

मैं लड़की हूँ – मेरी अपनी पहचान, मेरी अपनी उड़ान
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✍️सिमरन सहनी

मैं लड़की हूँ…
किसी रिश्ते की मुझे ज़रूरत नहीं,
न नामों का सहारा चाहिए,
न पहचान का बोझ।

बेटी, माँ, बहन…
ये सब अपने हैं, मानती हूँ,
पर मेरी पहचान सिर्फ इतनी क्यों?
क्यों मैं हर बार किसी से जुड़कर ही जानी जाऊँ?

मत बाँधो मुझे इन जंजीरों में,
ये रिश्तों के नाम कभी-कभी
मेरे पंखों को रोक देते हैं,
और मैं रुकने के लिए नहीं बनी।

मैं खुला आसमान हूँ,
मेरे सपनों की कोई सीमा नहीं,
मेरे हौसलों की कोई दीवार नहीं।

मुझे बस “लड़की” ही रहने दो,
जिसमें अपनी एक आग है,
एक जिद है,
और खुद को साबित करने का जुनून है।

न मुझे परिभाषाओं में बाँधो,
न मुझे सीमाओं में रोको,
मैं अपनी राह खुद बनाऊँगी—
हर कदम पर अपनी पहचान छोड़ जाऊँगी।

हाँ… मैं लड़की हूँ,
और बस यही मेरी असली पहचान है।

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