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रचूं इतिहास मैं ऐसा

प्रेरणादायक कविता थीम पर युवती लिखते हुए और पीछे तिरंगा लिए युवा, सफलता और संकल्प का दृश्य
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✍️नवोदित कलम

रचूं इतिहास मैं ऐसा – प्रेरणादायक कविता फीचर इमेज

पायल कुमारी
कक्षा : 12वीं
उच्च माध्यमिक विद्यालय
जारंग पूर्वी, गायघाट (मुजफ्फरपुर)

सोई मैं प्रण करके ऐसा
बनूं इंसान मैं एक ऐसा
न होगी आलस्य की तानाशाही
अब दूँगी ना मैं मन को ढिलाई
मार के इस मन को मैं
शुरू करूँ समय की भरपाई।

सोई मैं प्रण करके ऐसा
रचूं इतिहास में नाम मैं ऐसा
दूंगी जवाब समाज को
कर दिखाऊंगी कुछ ऐसा
आएंगे पीठ थपथपाने और मिलाने हाथ को
जिस दिन ये प्रण होगा सफल
उस दिन होगी जलने वालों की बात विफल

जब सोई मैं प्रण करके ऐसा
एक दिन सवेरा आऐगा ऐसा
नाम भी होगा, काम भी होगा
लेकिन ये एक दिन में न होगा
लगेंगे महीनों और कई बरस
कभी तो आएगा वो दिन
जब सफलता हमारी कदम चूमेगी

थक जाएगा तन अगर ये
ना थकने दूंगी मैं अपने मन को
धोऊंगी अखियां को ऐसे
चमके चांद-सूरज के जैसे
लें युवा सब प्रण इक ऐसा
तभी देश बनेगा विकसित हमारा
तब न अशिक्षित और
पिछड़ा शब्दों से नवाजा जाएगा
फिर से सोने की चिड़िया कहलाएगा

तो करते हैं सब प्रण इक ऐसा
बनें जिम्मेदार अभिभावक जैसा
ताकि फैल जाए प्रकाश हमारा
पूरे संसार में चारों दिशाओं में
महान आत्मा और सूर्य के जैसा।

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