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बाढ़ के पानी में डूबे सैकड़ों घर, तटबंध में रिसाव से अफरातफरी

मुजफ्फरपुर के साहेबगंज और पारू प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. नेपाल में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से गंडक, बूढ़ी गंडक और नारायणी नदी के किनारे बसे गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं. सैकड़ों घर पानी से घिरे हैं, जबकि कई घरों में पानी प्रवेश कर चुका है. बाढ़ के कारण लोगों के घरेलू सामान डूब गए हैं और मवेशियों के लिए चारा-दाना जुटाना मुश्किल हो गया है. बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई प्रभावित परिवार बांध किनारे प्लास्टिक तानकर रहने को

बाढ़ के पानी में डूबे सैकड़ों घर, तटबंध में रिसाव के बाद लोगों में अफरातफरी
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  • मुजफ्फरपुर जिले के पारू व साहेबगंज प्रखंड के दर्जनों गांवों में फैला पानी
  • गंडक नदी बौराई, दहशत में हैं ग्रामीण
  • तटबंध को बचाने में दिनभर जुटे रहे ग्रामीण
✍️सिमरन सहनी की रिपोर्ट

साहेबगंज/पारू, मुजफ्फरपुर। सैकड़ों घरों के चारों तरफ पानी है. आंगन में पानी, घर के अंदर पानी और बाहर निकलने के रास्ते पर भी पानी. घर में रखे सामान बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं. मवेशी भी उसी पानी के बीच खड़े हैं और उनके लिए चारा-दाना जुटाना मुश्किल हो गया है. बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के दूसरे सदस्यों को सुरक्षित रखने की चिंता अलग है. बाढ़ के इस मंजर के बीच प्रभावित परिवारों के सामने एक ही सवाल है— अगर पानी और बढ़ा तो वे कहां जाएंगे?

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज और पारू प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. नेपाल में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से गंडक, बूढ़ी गंडक और नारायणी नदी के किनारे स्थित गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं. कई परिवार बांध किनारे शरण लिये हुए हैं. मवेशियों से लेकर बच्चे, उम्रदराज लोग, गर्भवती महिलाएं और बीमार लोग खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक तानकर भय के साये में रहने को मजबूर हैं.

साहेबगंज प्रखंड के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. जिले के माधोपुर हजारी से लेकर रेवा घाट तटबंध के करीब 35 किलोमीटर तक के हजारों लोग घर-द्वार छोड़कर विस्थापित होकर बांध पर खौफ के साये में जी रहे हैं.
हुस्सेपुर पंचरुखिया, पांचगछिया, रूपछपरा, पहाड़पुर, नयाटोला, हजारी माधोपुर, बंगरा, चांदकेवारी, धरफरी, उस्ती-सिंगाही, बैजलपुर, जयमल डुमरी समेत दर्जनों गांव-कस्बों के हजारों लोग बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित हैं.

चक्की सुहागपुर में चारों तरफ पानी

पारू प्रखंड की चक्की सुहागपुर पंचायत भीषण बाढ़ की चपेट में है. पंचायत में करीब 600 मकान और लगभग 5,000 की जनसंख्या है. करीब 500 मवेशी भी बाढ़ से प्रभावित हैं. पंचायत चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरी हुई है. यहां लोगों के सामने भोजन के साथ-साथ मवेशियों के चारा-दाना की भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. जानकारी के अनुसार, वहां मात्र 100 लोगों का ही खाना बन पा रहा है. पंचायत के मुखिया चंदन कुमार सहनी हैं. बाढ़ के पानी से घिरे परिवार अपने घर और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. जिन घरों में पानी पहुंच गया है, वहां रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है.

जयमल डुमरी में 500 परिवार प्रभावित

वहीं जयमल डुमरी पंचायत में करीब 500 घर-परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. यहां प्रभावित लोगों की जनसंख्या करीब 4,000 बताई गई है. पंचायत के मुखिया छोटे जी के अनुसार, बाढ़ में दो व्यक्ति डूबकर लापता हैं. इस जानकारी के बाद प्रभावित परिवारों के बीच चिंता और भय व्याप्त हो गया है. बाढ़ के पानी ने लोगों की जिंदगी को अचानक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां घर में रखे सामान को बचाना भी मुश्किल हो गया है और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है.

चक्की सोहागपुर में दर्जनों घरों में 4 से 5 फीट पानी

पारू प्रखंड की चक्की सोहागपुर पंचायत में भी भीषण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. पूरे पंचायत में बाढ़ का पानी फैल गया है। ग्रामीणों के अनुसार, हर घर का सामान पानी में डूबकर नष्ट हो गया है. कई घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भरा हुआ है. घरों में पानी भर जाने से लोगों के सामने रहने और जरूरी सामान बचाने की चुनौती है. मवेशी भी उसी पानी के बीच रखे हुए हैं. उनके लिए चारा-दाना जुटाना भी मुश्किल हो गया है. यहां बाढ़ सिर्फ घरों की दीवारों तक नहीं पहुंची है, बल्कि परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी अपने साथ बहा ले गई है. जिस घर में कभी चूल्हा जलता था, उसी घर में अब पानी भरा है. जिस आंगन में बच्चे खेलते थे, वहां अब बाढ़ का पानी है और मवेशी उसी पानी के बीच खड़े हैं.

बांध टूटने की स्थिति से मची अफरा-तफरी

बुधवार यानी 30 सितंबर को बाढ़ का पानी अचानक बढ़ने के कारण गांव में लोगों के बीच काफी अफरातफरी मच गई. सुबह करीब 10 बजे दोबंधा केवाड़ा के पास बांध टूटने की स्थिति बन गई थी. बांध से तेजी से पानी का रिसाव हो रहा था और पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा था. लोग भागने लगे. बच्चों और बुजुर्गों को बांध पर ले जाने लगे. कुछ लोग इतना घबरा गए कि उनकी तबीयत भी खराब होने लगी.

स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोग तुरंत एकजुट होकर बांध को बचाने में जुट गए. लोगों ने मिट्टी से भरी बोरियों की मदद से पानी को रोकने का प्रयास किया. काफी देर तक प्रयास करने के बाद धीरे-धीरे पानी का बहाव कुछ कम हुआ. इसके बाद ट्रैक्टर की मदद से बांध के पास राबिश गिराया गया. हालांकि, अब भी लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और लोग लगातार बांध पर नजर रख रहे हैं. कई लोग रात में भी बांध के पास जागकर निगरानी करने की बात कह रहे हैं.

घर छोड़ने का डर, सामान बचाने की चिंता

बाढ़ के डर से बहुत से लोग अपने-अपने रिश्तेदारों के घर अपनी सुविधा और स्थिति के अनुसार चले गए हैं. लेकिन उनके सामने एक बड़ा सवाल है— अगर घर छोड़ना पड़ा तो, वे कहां जाएंगे और घर में रखे इतने सारे सामान लेकर कहां जाएंगे? कई लोग अपने घर और सामान को छोड़ने की चिंता में काफी परेशान और डरे हुए हैं. जिन लोगों के घरों में पानी पहुंच गया है, उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद दी जा रही है. ऐसे परिवारों को बिस्कुट, चूड़ा और जरूरत की अन्य चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं.

हुस्सेपुर रत्ती के मुखिया जीतेन्द्र राय ने कहा कि इस पंचायत के करीब 500 घरों के करीब 1,800 लोग बाढ़ की चपेट में हैं. करीब 150 मवेशी बाढ़ की तेज धारा में बह गए हैं. राहत कार्य और बचाव का काम तेजी से चल रहा है. फंसे लोगों को नाव के जरिए सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है.

हुस्सेपुर पंचायत के मुखिया अनमोल राय प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हुए हैं. वहीं, रूपछपरा के करीब 3,000, पहाड़पुर के 1,000 और चांदकेवारी के 1,500 लोग प्रभावित हैं. चांदकेवारी की मुखिया रीना कुमारी के प्रतिनिधि सिपाही प्रसाद कुशवाहा बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं.

बाढ़ के पानी के बीच जिंदगी किसी तरह आगे बढ़ रही है. कहीं, परिवार खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक तानकर रात काट रहे हैं, तो कहीं घरों में कई फीट पानी भरा है. किसी के सामने भोजन की चिंता है, तो किसी के सामने मवेशियों के चारा-दाना की.
पूर्व सरपंच राजकुमार दास ने बताया कि अब भी लोग डर और चिंता के बीच अपने घर, परिवार और सामान की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं. गांव में स्थिति गंभीर बनी हुई है और लोग किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए लगातार सतर्क हैं.
बाढ़ के इस संकट में लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि पानी थमे, घर सुरक्षित रहें और उनके परिवार तथा मवेशियों को सुरक्षित जगह मिल सके.

पीएलवी फुलदेव पटेल ने बताया कि प्रलयकारी बाढ़ पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए डीएम साहब से टेलीफोनिक बात हुई। उन्होंने बताय कि दोनों प्रखंडों का रात्रि में दौरा किया गया है और बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए रहने और खाने की जरूरत की व्यवस्था करने के लिए दोनों अंचल अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं।

जानकारी हो कि पिछले दिनों जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने जिले के सभी बीडीओ व सीओ को पत्र भेज कर आपदा पीड़ितों को विधिक सेवा प्राधिकार के तहत राहत व जरूरी सेवाएं एवं मदद पहुंचाने का निर्देश दिया था. इन इलाकों के बाढ़ पीड़ितों को सरकारी मदद की दरकार है. वहीं पारा विधिक स्वयंसेवकों को भी बाढ़ पीड़ितों तक राहत व जरूरी सेवाएं पहुंचाने में मदद करने का निर्देश दिया गया है.

उधर, गंडक व गंगा नदी में उफान का असर सोनपुर प्रखंड के कई इलाकों पर भी देखने को मिल रहा है. सबलपुर पूर्वी, उत्तरी, मध्यवर्ती एवं सबलपुर पश्चिमी पंचायत के लोग बाढ़ की चपेट में है. दर्जनों घर पानी में डूब गए हैं. स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है.

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