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गौरैया

यह कविता गौरैया के माध्यम से प्रकृति, अपनापन और सुबह की मधुरता को व्यक्त करती है। कवयित्री पल्लवी भारती गौरैया की चहचहाहट में छिपे संदेश और मनुष्य-प्रकृति के आत्मीय संबंध को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती हैं।

गौरैया कवयित्री पल्लवी भारती की कविता
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✍️पल्लवी भारती

जब रोज़ सुबह गौरैया मेरे घर आती है
न जाने कौन-सी भाषा में कुछ संदेश दे जाती है
आंखें खुलने से पहले उसकी मधुर चहचहाहट
मन में एक नई उमंग जगा जाती है
कभी खिड़की के शीशे में खुद को देखकर
बेचैन होकर इधर-उधर उड़ जाती है
कुछ पल ठहर अपने ही धुन में गीत सुना जाती है
कभी चंचल, कभी खामोश हो जाती है
हर दिन एक नई कहानी कह जाती है
इस मशीनी औ’ भाग-दौड़ भरे दौर में
वह प्रकृति की सुंदर झलक दिखला जाती है
सचमुच हर सुबह कुछ खास बन जाती है
जब गौरैया मेरे घर आती है।

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