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नैहर से छुड़ाकर लाई अपने दो मासूम बच्चे

नैहर से छुड़ाकर लाई मां अपने दो मासूम बच्चे, अदालत की मदद से मिली राहत
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  • अदालत का खटखटाया दरवाजा, मायके वालों के चंगुल से दो मासूम बच्चों को छुड़ाकर लाई मां
  • महिला की मां ने जनप्रतिनिधि व समाज के लोगों की नहीं मानी बात, तो घर पहुंची पुलिस और गठित टीम
  • पति की पिटाई से नाराज होकर मायके गई थी महिला, अपनी ही मां के जाल में फंसी, तोड़ देना चाहती थी विवाह
  • कर्ज के 50 हजार रुपये लौटाने के भय से अपनी बेटी का ही घर उजाड़ देना चाहती थी कलयुगी मां

आमतौर पर महिलाओं को ससुराल में प्रताड़ना और मारपीट के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ती है। न्याय के लिए उन्हें कोर्ट और पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। लेकिन, मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी थाना क्षेत्र के जलालपुर गाँव निवासी 27 वर्षीया एकसार बेगम की कहानी कुछ अलग है। पति की पिटाई के बाद मायके आई महिला को अपने ही दो बच्चों को नानी और मामा के चंगुल से छुड़ाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जानिए, एक पाँचवीं पास महिला ने कैसे अपनी सूझ-बूझ से अपने उजड़े घर को बसाने के साथ-साथ अपने दोनों बच्चों को भी वापस पाया.

✍️रिपोर्ट ::: यशोदा कुमारी पासवान

नैहर से छुड़ाए बच्चे: मां की संघर्ष की कहानी

दो वर्ष पूर्व एकसार बेगम के पति ने किसी बात को लेकर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि वह अपने दो बच्चों के साथ ससुराल छोड़कर मायके चली गईं। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अपनी माँ को पूरी घटना बताई और रो पड़ीं। माँ ने उन्हें मायके में ही रहने की सलाह दी, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

इस बीच एक दिन एकसार बेगम की अपने पति से बातचीत हुई। मारपीट की घटना के बाद यह उनकी पहली बातचीत थी। दोनों ने एक-दूसरे से अपने गिले-शिकवे साझा किए और अपनी-अपनी गलतियों का एहसास भी किया। पति ने कहा कि परिवार में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं, इसके कारण उन्हें नाराज़ होकर मायके नहीं जाना चाहिए था। इस पर पत्नी ने उत्तर दिया कि उन्हें भी रोकना चाहिए था और फोन करके बात करनी चाहिए थी।

इसके बाद दोनों के बीच नियमित रूप से बातचीत होने लगी और वे एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने लगे। कुछ समय बाद महिला ने मायके में रहते हुए पति से पैसों की माँग की, जिसे पति ने भेज दिया। इस प्रकार पति समय-समय पर आवश्यकता अनुसार उन्हें रुपये भेजता रहा।

बाद में पत्नी के कहने पर मायके वालों को घर बनाने के लिए पति ने 50,000 रुपये उधार दिए। इससे दोनों के बीच पुनः विश्वास स्थापित होने लगा। इसी दौरान पति ने पत्नी से ससुराल वापस आने की इच्छा व्यक्त की। यह सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न हो गईं। संभवतः वह भी पति से मिलने के लिए उत्सुक थीं। अतः उन्होंने पति के प्रस्ताव को सहजता से स्वीकार कर लिया और ससुराल लौटने के लिए तैयार हो गईं।

मां ने बेटी को सुसराल आने से किया मना

जब बेटी ने अपने ससुराल जाने की इच्छा प्रकट की, तो उसकी माँ ने हैरान कर देने वाली बात कह दी। उसने कहा कि तुम दूसरी शादी कर लो, लेकिन ससुराल मत जाओ। यह सुनकर एकसार बेगम सन्न रह गईं। सामान्यतः हर माँ अपनी बेटी का घर बसाने के लिए हर संभव प्रयास करती है, लेकिन यह कैसी माँ है, जो अपनी ही बेटी का घर तोड़ना चाहती है।

हद तो तब हो गई, जब उसकी माँ उसे उसके पति से बात भी नहीं करने देती थी और हमेशा उस पर नजर रखती थी। तब बेटी ने अपनी माँ की मंशा जानने का प्रयास किया। पता चला कि यह सब 50,000 रुपये के कारण हो रहा है। यदि बेटी ससुराल चली जाती, तो वह राशि उसके पति को लौटानी पड़ती। इसी कारण उसे जाने नहीं दिया जा रहा था। उधर, एकसार बेगम ने भी ससुराल जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। वह किसी तरह अपने पति से बात करके ससुराल जाने की जिद करने लगीं।

दो बच्चों को छोड़कर सुसराल जाने की मां ने रखा प्रस्ताव

एकसार बेगम की माँ ने कहा कि यदि तुम ससुराल जाना चाहती हो, तो ठीक है, लेकिन अपने दोनों बच्चों को यहीं छोड़कर जाना होगा; बच्चे बाद में भेज दिए जाएँगे। महिला ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया, परंतु उसकी माँ बच्चों को न भेजने की जिद पर अड़ी रही। अंततः महिला विवश होकर अपने दोनों बच्चों को वहीं छोड़कर ससुराल आ गई। वह ससुराल में रहने लगी, किंतु बच्चों के बिना उसका मन बिल्कुल नहीं लगता था। वह हर समय बच्चों की याद में खोई-खोई रहती थी।

महिला की माँ दोनों बच्चों से उसकी बात भी नहीं होने देती थी। जब एकसार बेगम ने अपने बच्चों से बात करने के लिए मायके में फोन किया, तो उसकी माँ ने उनसे बात नहीं कराई। लगभग पंद्रह दिनों तक बच्चों से उसकी बातचीत नहीं होने दी गई। इसके बाद उसने पड़ोसी के फोन से बच्चों के बारे में जानकारी ली और अपनी माँ से भी बात की। उसकी माँ ने स्पष्ट कह दिया कि बच्चों को तुम्हें नहीं देंगे। यह सुनकर वह फूट-फूटकर रोने लगी।

अदालत का खटखटाया दरवाजा, टीम ने की पहल

एकसार बेगम ने लोगों से सलाह लेकर अपने बच्चों को अपने पास लाने के लिए अदालत में आवेदन दिया। अदालत द्वारा गठित टीम ने पहले महिला के मायके जाकर घरवालों से बात की। इस दौरान महिला की माँ और भाई ने बताया कि उसका शौहर गाली देता है, इसलिए वे बच्चे नहीं देंगे।

टीम ने दोनों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने अपशब्द कहकर बच्चों को देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद टीम ने स्थानीय सरपंच से मिलकर समस्या से अवगत कराया। सरपंच ने ग्राम कचहरी में आवेदन कराने को कहा। हालाँकि, वहाँ भी यह कहा गया कि सरकार ने उन्हें ऐसा कोई अधिकार या बल नहीं दिया है कि वे किसी के पास जाकर जोर-जबर्दस्ती कर सकें।

सरपंच से नहीं सुलझा मामला, तो थाने पहुंची टीम

अदालत द्वारा गठित टीम के सदस्यों ने थाने जाकर थाना प्रभारी से बात की। थाना प्रभारी ने कहा कि जब तक महिला के माता-पिता नहीं आएँगे, तब तक वे कुछ नहीं कर सकते; पहले उन्हें लेकर आइए। यह सुनकर टीम के सदस्य कुछ देर के लिए चुप हो गए। इसके बाद उन्होंने पुनः जाकर कहा कि महिला वयस्क है और उसके दो बच्चे भी हैं, तो वह किसी अन्य को क्यों बुलाएगी? हम लोग स्वयं उसके साथ हैं और संगठन से आए हैं।

तब थाना प्रभारी ने कहा कि ठीक है, आप आवेदन दीजिए। इसके बाद टीम के सदस्य लगभग दो घंटे तक थाने में बैठे रहे और फिर प्रभारी से मिलकर बात की। वे तब तक थाने में बैठे रहे, जब तक डायल 112 की गाड़ी नहीं आ गई। उसी गाड़ी से टीम के सदस्य महिला के मायके पहुँचे।

पुलिस के पहुँचते ही उन्होंने मायके वालों से पूछा कि आप लोग बच्चों को उनकी माँ के पास क्यों नहीं जाने दे रहे हैं। यह कानूनन अपराध है और इसके लिए आपको सजा हो सकती है। यह सुनकर महिला की माँ और भाई घबरा गए; उनके पैर काँपने लगे और मुँह से आवाज तक नहीं निकल रही थी। उनके चेहरे पर पुलिस का डर साफ झलक रहा था।

कुछ ही देर में माँ और भाई ने अपने तेवर बदलते हुए कहा कि वे बच्चों को नहीं रोक रहे हैं; वे उनके अपने बच्चे हैं, उन्हें साथ ले जाएँ। इतने में दोनों बच्चे अपनी माँ के पास आए और गले लगकर रोने लगे। महीनों से अपने बच्चों के लिए तरस रही माँ की आँखों से भी आँसू बहने लगे। यह दृश्य देखकर वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति भावुक हो गया।

अंततः महिला अपने बच्चों को लेकर ससुराल लौट आई और अब वह अपने पति के साथ खुशीपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही है।

Photo Credit : chatgpt AI

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