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जानकारी के अभाव में अधूरी रह जाती हैं सरकारी योजनाएँ

सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी का अभाव बड़ी चुनौती बना हुआ है. मुजफ्फरपुर जिले के पारू प्रखंड के चाँद केवारी गाँव में लोगों से बातचीत के दौरान सामने आया कि आयुष्मान कार्ड, आभा कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी अधिकांश लोगों तक नहीं पहुँच पाई है. परिणामस्वरूप अनेक पात्र लोग इन योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं. यह फीचर स्टोरी बताती है कि योजनाओं की सफलता केवल उनके निर्माण में नहीं, बल्कि उनकी सही और समय पर जानकारी हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचाने

सरकारी योजना शिविर के पास बैठी ग्रामीण महिला सरकारी योजनाओं की जानकारी वाला पर्चा हाथ में लिए चिंतित दिखाई दे रही है. यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाती है.
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रिपोर्ट : ✍️सिमरन सहनी

सरकार हर वर्ष स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अनेक योजनाएँ शुरू करती है. इन योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुँचाना है. लेकिन जब योजनाओं की जानकारी ही लोगों तक नहीं पहुँचती, तो उनका लाभ कागज़ों तक सीमित रह जाता है. मुजफ्फरपुर जिले के पारू प्रखंड के चाँदकेवारी गाँव की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है, जहाँ बातचीत के दौरान यह साफ़ दिखा कि योजनाओं की कमी नहीं है, बल्कि जानकारी की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.

कार्ड है, लेकिन भरोसा नहीं

40 वर्षीय रेखा देवी से जब आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा गया कि क्या उनके पास कार्ड है या वे बनवाना चाहेंगी, तो उनका जवाब किसी सरकारी रिपोर्ट से कहीं अधिक सच्चाई बयां करता है.

“आयुष्मान कार्ड बनवाकर क्या होगा? मैं एक बार कार्ड लेकर अस्पताल गई थी इलाज कराने के लिए, लेकिन वहाँ इस कार्ड से इलाज नहीं हुआ. फिर मुझे अपने पैसे से इलाज कराना पड़ा.”

रेखा देवी का अनुभव केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं है. यह उस व्यवस्था की ओर इशारा करता है, जहाँ लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि आयुष्मान कार्ड किन अस्पतालों में मान्य है, उसका उपयोग कैसे करना है और लाभ लेने की प्रक्रिया क्या है. नतीजा यह होता है कि योजना होने के बावजूद लोगों का भरोसा कमजोर पड़ जाता है.

जब योजना का नाम भी पहली बार सुनाई दे

स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए सरकार ने आभा कार्ड की शुरुआत की है. लेकिन चाँदकेवारी गाँव के 55 वर्षीय सुरेंद्र पटेल ने इसका नाम भी पहली बार सुना.

“आभा कार्ड क्या होता है? हमने तो इसके बारे में पहली बार सुना है.”

यह प्रतिक्रिया बताती है कि कई ग्रामीण आज भी ऐसी योजनाओं से पूरी तरह अनजान हैं, जिनका उद्देश्य उनके इलाज और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को आसान और सुरक्षित बनाना है. जानकारी के अभाव में तकनीक आधारित सुविधाएँ गाँव तक पहुँचने से पहले ही ठहर जाती हैं.

किसानों तक भी नहीं पहुँच रही योजनाओं की जानकारी

जानकारी की कमी केवल स्वास्थ्य योजनाओं तक सीमित नहीं है. खेती-किसानी से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों का हाल भी कुछ ऐसा ही है.

36 वर्षीय मीना देवी बताती हैं,

“सरकार तो कहती है कि किसानों के लिए बहुत सारी योजनाएँ हैं, लेकिन हमें इनके बारे में जानकारी नहीं मिलती. हम महंगे दाम पर खाद, बीज और खेती की दूसरी चीजें खरीदते हैं. अगर कोई सुविधा है, तो हमें पता ही नहीं चलता कि उसे कैसे लिया जाए.”

सरकार किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी सुविधा उपलब्ध कराती है, जिसके माध्यम से किसान खेती के लिए ऋण लेकर बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य आवश्यक खर्च पूरे कर सकते हैं. लेकिन जानकारी के अभाव में अनेक किसान इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते.

शिक्षा में भी जागरूकता की कमी

गाँव के कई परिवारों को यह भी जानकारी नहीं है कि उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना उपलब्ध है. आर्थिक रूप से कमजोर छात्र इस योजना के माध्यम से आगे की पढ़ाई जारी रख सकते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कई युवा इस अवसर से वंचित रह जाते हैं.

अधिकारी क्या कहते हैं?

योजनाओं की जानकारी लोगों तक कैसे पहुँचाई जाती है, इसे समझने के लिए साहेबगंज प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि गाँवों में विकास मित्र लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याएँ सुनते हैं और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करते हैं. इसके अलावा समय-समय पर शिविर भी लगाए जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें.

लेकिन गाँव की हकीकत कुछ और है

चाँद केवारी गाँव के लोगों का कहना है कि कई बार उन्हें यह जानकारी ही नहीं मिलती कि शिविर कब और कहाँ लगाया जा रहा है. जिन लोगों को पहले से सूचना मिल जाती है या जो पहले से जागरूक होते हैं, वही योजनाओं का लाभ उठा पाते हैं. जबकि सबसे अधिक जरूरतमंद लोग जानकारी के अभाव में पीछे रह जाते हैं. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वृद्धा पेंशन जैसी सुविधाओं के लिए भी कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और इस प्रक्रिया में समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है.

जानकारी ही सबसे बड़ी सुविधा है

चाँद केवारी गाँव की यह कहानी केवल एक गाँव की नहीं, बल्कि उन अनेक ग्रामीण इलाकों की तस्वीर है जहाँ सरकारी योजनाएँ तो मौजूद हैं, लेकिन उनकी जानकारी लोगों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाती. योजनाओं की सफलता केवल उनके शुरू होने से नहीं मापी जा सकती. उनकी वास्तविक सफलता तब है, जब हर जरूरतमंद व्यक्ति यह जान सके कि उसके लिए कौन-सी सुविधा उपलब्ध है, वह उसका लाभ कैसे ले सकता है और बिना भटकाव के उसे समय पर सहायता मिल सके. क्योंकि जब जानकारी लोगों तक नहीं पहुँचती, तो सबसे अच्छी योजना भी अपने उद्देश्य से दूर रह जाती है.

महत्वपूर्ण लिंक

Ayushman कार्ड  https://abdm.gov.in/

आभा क्या है? https://abha.abdm.gov.in/abha/v3/register

KCC https://sbi.bank.in/web/agri-rural/agriculture-banking/crop-loan/kisan-credit-card

Student Credit card Apply https://www.7nishchay-yuvaupmission.bihar.gov.in/howToApply

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