✍️पल्लवी भारती
जब रोज़ सुबह गौरैया मेरे घर आती है
न जाने कौन-सी भाषा में कुछ संदेश दे जाती है
आंखें खुलने से पहले उसकी मधुर चहचहाहट
मन में एक नई उमंग जगा जाती है
कभी खिड़की के शीशे में खुद को देखकर
बेचैन होकर इधर-उधर उड़ जाती है
कुछ पल ठहर अपने ही धुन में गीत सुना जाती है
कभी चंचल, कभी खामोश हो जाती है
हर दिन एक नई कहानी कह जाती है
इस मशीनी औ’ भाग-दौड़ भरे दौर में
वह प्रकृति की सुंदर झलक दिखला जाती है
सचमुच हर सुबह कुछ खास बन जाती है
जब गौरैया मेरे घर आती है।











